झारखंड में जेवीएम की लहर, बनेगी बाबूलाल मरांडी की सरकार

झारखंड में परिवर्तन का लहर चल पड़ा है। राज्य की जनता झाविमो को उम्मीद भरी निगाह से देख रही है। इस बार झाविमो की सरकार बनाते हैं। रघुवर सरकार के जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता गोलबंद हो चुकी है।आने वाला दिन झाविमो का है। सारे झारखंड के अखबारों में बाबूलाल मरांडी की बातें उनके विचार जनता के बीच रखे गए हैं।

झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के राज्य के दिग्गज नेताओं में से एक हैं। इस बार वह कोडरमा से चुनाव मैदान में है।झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रमुख नेताओं ने उनका नाम शुमार है। बबली मंडी करीब 1 साल तक एक सरकारी प्राथमिक स्कूल के शिक्षक भी रहे हैं।

संतान समुदाय से संबंध रखने वाले मरांडी झारखंड में भाजपा के बड़े नेताओं में से एक रहे हैं।हालांकि बाद में उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली मगर इससे पहले उन्होंने भाजपा को कई सफलताएं दिलाई वर्ष 2000 में बिहार से अलग होने के बाद जब झारखंड राज्य का गठन हुआ तब इंडिया के नेतृत्व में पहली बार सरकार बनी और मरांडी पहले मुख्यमंत्री उन्होंने ग्रेटर रांची स्थापित करने की योजना भी बनाई ताकि राजधानी रांची से दवा कम किया जा सके मगर साल के भीतर ही उन्हें मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ा।

वे एक हार से जीतने वाले नेता है। बाबूलाल मरांडी 1991 से भाजपा के टिकट पर दुमका लोकसभा से उम्मीदवार थे। लेकिन,दिग्गज शिबू सोरेन के सामने उन्हें सफलता नहीं मिली।1996 लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर से सोरेन को चुनौती दी।इस बार महज 5000 वोट से जीत उनसे दूर रह गई।इस हार के बाद उनका भाजपा में कद बढ़ गया। उन्हें भाजपा ने झारखंड का अध्यक्ष बना दिया गया था।फिर उनके नेतृत्व में जब लोकसभा चुनाव लड़ा गया तो 14 में से 12 लोकसभा सीटों पर चुनाव जीते।खुद बाबूलाल मरांडी चार बार झारखंड से सांसद रहे है।
उनके 28 महीनों की सरकार रहते हुए कई अहम काम किए।चाहे वो सड़क परिवहन ठीक करना हो या सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार लाना हो।उनके 28 महीने के कार्यकाल अब तक के झारखंड के इतिहास के स्वर्णिम काल रहे ।

इसके बाद उन्हें राजनीति के सौदागरों ने राज्य की सेवा करने के पद से निकाल दिया।फिर भी उन्होंने राज्य की सेवा और विकास के मोर्चे पर खड़े रहने के लिए झारखंड विकास मोर्चा पार्टी की स्थापना 2005 में की।जो अब 2019 में अपने राजनीतिक सफर के इस मकाम तक पहुंच चुकी है कि वह अब सत्ता पलट कर खुद राज्य की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त करने जा रही है।

इसके लक्षण साल 2014 में दिख गए थे,जब सरकार में रहते हुए भी बीजेपी ने जेवीएम पार्टी के विधायकों को तोड़कर अपने में मिला लिया।क्योंकि वे जानते है कि जेवीएम और बाबूलाल मरांडी उनके लिए कितना बड़ा खतरा बन सकते है। बीजेपी ने पांच साल एक गंदी राजनीति करते हुए राज्य में सत्ता चलाई है, अगर वह ऐसा नहीं करती तो वह राज्त में पांच दिन भी न टीक सकती।उसने अपने प्रतिद्वंद्वी पार्टीयों के नेताओं को खरीद लिया है। बीजेपी राज्त की पहली नंबर की पार्टी थी,और जेएमएम दूसरी नंबर की पार्टी थी, लेकिन बीजेपी ने जेएमएम के नेताओं को खरीदकर अपने मिला लिया है।अब केवल बीजेपी को टकर देने वाली पार्टी झारखंड विकास मोर्चा बची है,जिसके कर्मनिष्ट कार्यकर्ताओं वाली पार्टी अपने ईमानदार नेता श्री बाबूलाल मरांडी के साथ अब जीत की दहलीज पर आ गई है।

अखबारों में अब सब जगह बाबूलाल मरांडी के कार्यक्रमों की खबरें जैसे जनता के साथ समागम,डिजिटली जनता से सीधा संवाद, बाबूलाल से बातचीत इन सब से ही भरा पड़ा है।सारा मौहाल बाबूलाल मरांडी और उनकी पार्टी की ओर बना हुआ है।जनता के बीच जब वहां के सवालों का जवाब खुद बाबूलाल मरांडी दे रहे है तो लग रहा है बाबूलाल उनके घर के अपने से है।ये अपनापन वोट में तब्दील होने जा रहा।2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में यह बाबूलाल मरांडी के संघर्षों उनकी पार्टी की मेहनत का ही परिणाम है जो अब रंग ला रही है‌। जेवीएम झारखंड की नंबर एक पार्टी बनकर उभरी है।यह फॉर्म उसे 2019 के चुनावों में जीत की दहलीज के पार ले जाएगा।

साल 2000 में प्राप्त राजनैतिक तौर पर जीत के बाद झारखंड राज्य एक खनिज संपदा, सांस्कृतिक तौर पर संपन्न राज्य के रूप में उभरा।झारखंडी जन-जीवन का संपूर्ण परिवेश बदला और एक नया परिप्रेक्ष्य हमारे सामने आया। लेकिन जन साधारण अपने सुखी और समृद्ध जीवन के जिस स्वप्न को बरसों से संजोए हुए था,वह साकार नहीं हुआ।राज्य स्तर, सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर भ्रष्टाचार,चरित्रहीनता और अनैतिकता फलने-फूलने लगी।19 सालों से इस ग्रसण में जकड़ी रही है।और अब इन सबसे ऊपर उठकर इन समस्याओं के बीच में रहकर इससे जूझते हुए नेता बाबूलाल मरांडी उबरे है जो झारखंड के हर समस्याओं से भली भांति परिचित है।उनकी ईमानदारी,अगर उन्हें वोट दिया जाए और सरकार में रहकर इस झारखंड राज्य की जनता की सेवा करने का सुअवसर मिला तो सच माने तो धोखा नहीं मिलेगा।इसी ईमानदारी ने उन्हें आज , जेएमएम,बीजेपी जैसी बड़ी पार्टी से ऊपर ला कर खड़ा कर दिया है।

 "बाबूलाल मरांडी और उनकी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा ने कड़ी मेहनत की है और इसका सबूत 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में जीत के रूप में दिखेगा।"

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